सरयूपारी क्या है ?
ऋग्वेद में तीन नदियों का वर्णन है सरस्वती, सिन्धु और सरयू। सरयू नदी के पूर्वी तट पर बसे ब्राहमण सरयूपारी या सरवरिया ब्राह्मण कहलाए।कहाँ से आया शांडिल्य गोत्र ?
वैसे तो भारत में बड़े ही ऋषि मुनि हुए किन्तु 49 ऋषियों के नाम पर गोत्र बने। ऋषियों के शिष्य प्रवरकार कहे जाते थे तथा इन ऋषियों के आश्रम में दी जाने वाली वेद, उपवेद आदि की शिक्षा के अनुरूप उन्हें गोत्र में बाटा गया। आज सरयूपारी ब्राहमण में जो 3, 13, 16 घराने कहे जाते हैं उसके पीछे उन ऋषियों के ज्ञान को आगे की पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए उन्हें अलग अलग शाखावो में विभाजित करना है।ऋषि गर्ग के आश्रम में यजुर्वेद का पठन पाठन आरम्भ हुआ तो पहला गोत्र गर्ग के नाम से आरम्भ हुआ। इसी प्रकार ऋषि गौतम और शांडिल्य के आश्रम में यजुर्वेद और सामवेद पढ़ाने की परम्परा शुरू हुई जो आगे चल कर गर्ग गौतम और शांडिल्य के नाम से गोत्र बने। इसी शांडिल्य गोत्र में हम सभी मणि वंशी त्रिपाठी का जन्म हुआ।
युधिष्ठिर की सभा में विद्यमान ऋषियों में शाण्डिल्य का नाम है। राजा सुमंतु ने इनको प्रचुर दान दिया था, यह अनुश पर्व (137। 22) से जाना जाता है। अनुशासन 65.19 से जाना जाता है कि इसी ऋषि ने बैलगाड़ी के दान को श्रेष्ठ दान कहा था।
महर्षि कश्यप के पुत्र महर्षि असित इनके पुत्र महर्षि देवल जिन्होंने ने अग्नि से एक पुत्र को उत्पन्न किया अग्नि से उत्पन्न होने के कारण इनको शांडिल्य कहा गया इनके दो पुत्र थे श्रीमुख एवं गर्दभ मुख आज भारत के सभी राज्यों में इनके वंशज मौजूद हैं।
शांडिल्य ऋषि के बारह पुत्र हुए जो इन बारह गांवों से प्रभुत्व रखते हैं।
- सांडी
- सोहगौरा
- संरयाँ
- श्रीजन
- धतूरा
- भगराइच
- बलूआ
- हरदी
- झूडीयाँ
- उनवलियाँ
- लोनापार
- कटियारी
इन्ही बारह गांवों से आज चारों तरफ इनका विकास हुआ है, यें सभी सरयूपारीण ब्राह्मण हैं। इनका गोत्र श्री मुख शांडिल्य त्रि प्रवर है, हमारा मूल स्थान श्रीजन है। श्री मुख शांडिल्य में घरानों का प्रचलन है जिसमे
- राम घराना
- कृष्ण घराना
- नाथ घराना
- मणी घराना है
इन चारों का उदय, सोहगौरा गोरखपुर से है, जहाँ आज भी इन चारों का अस्तित्व कायम है, जिसमे मणि घराना बुढियाबारी से है।
उप शांडिल्य ( तिवारी- त्रिपाठी, वंश)
इनके छ: गाँव बताये जाते हैं जी निम्नवत हैं।
- शीशवाँ
- चौरीहाँ
- चनरवटा
- जोजिया
- ढकरा
- क़जरवटा
भार्गव गोत्र (तिवारी या त्रिपाठी वंश)
भार्गव ऋषि के चार पुत्र बताये जाते हैं जिसमें चार गांवों का उल्लेख मिलता है|
- सिंघनजोड़ी
- सोताचक
- चेतियाँ
- मदनपुर
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