Wednesday, April 29, 2020

पूज्य स्वर्गीय श्री लोचन मणि त्रिपाठी वंशावली


<=इनसे पूर्व


  • पूज्य स्वर्गीय श्री लोचन मणि त्रिपाठी
    • पूज्य स्वर्गीय श्री सोमई उर्फ़ कमला मणि त्रिपाठी
    • पूज्य स्वर्गीय श्री अमला मणि त्रिपाठी

पूज्य स्वर्गीय श्री भगवान मणि त्रिपाठी वंशावली


<=इनसे पूर्व 


  • पूज्य स्वर्गीय श्री भगवान मणि त्रिपाठी वंशावली
    • पूज्य स्वर्गीय श्री सरयू मणि त्रिपाठी
    • पूज्य स्वर्गीय श्री कल्पन मणि त्रिपाठी
      • श्री राम गोपाल मणि त्रिपाठी
        1. श्री त्रिलोकी नाथ मणि त्रिपाठी
        2. श्री दुखरन मणि त्रिपाठी
      • श्री राम सुमेर मणि त्रिपाठी
    • पूज्य स्वर्गीय श्री रघू मणि त्रिपाठी

पूज्य स्वर्गीय श्री पटेशर मणि त्रिपाठी वंशावली

<=इनसे पूर्व


  • पूज्य स्वर्गीय श्री पटेशर मणि त्रिपाठी
    • श्री जगन मणि त्रिपाठी
      • श्री राम वरन मणि त्रिपाठी
    • श्री राम लाल मणि त्रिपाठी
      • श्री भवनाथ मणि त्रिपाठी
        1. श्री सहजराम मणि त्रिपाठी
        2. श्री फूलराम मणि त्रिपाठी
        3. श्री आज्ञा राम मणि त्रिपाठी 

श्री राम प्यारे मणि त्रिपाठी वंशावली

<= इनसे पूर्व


  • श्री राम प्यारे मणि त्रिपाठी
    • श्री परमात्मा मणि त्रिपाठी
    • श्री आत्माराम मणि त्रिपाठी
    • श्री राम मूरत मणि त्रिपाठी

    पूज्य स्वर्गीय श्री राधे मणि त्रिपाठी वंशावली


    <=इनसे पूर्व


    • पूज्य स्वर्गीय श्री राधे मणि त्रिपाठी
      • पूज्य स्वर्गीय श्री उदित मणि त्रिपाठी
      • पूज्य स्वर्गीय श्री अलगू मणि त्रिपाठी


    पूज्य स्वर्गीय श्री राम किशुन मणि त्रिपाठी वंशावली


    <= इनसे पूर्व 


    • पूज्य स्वर्गीय श्री राम किशुन मणि त्रिपाठी
      • श्री कालीचरण मणि त्रिपाठी
        • श्री सहदेव मणि त्रिपाठी
          1. श्री कवलपति मणि त्रिपाठी
          2. श्री देवी दीन मणि त्रिपाठी
        • श्री दुर्गा मणि त्रिपाठी
      • श्री ठाकुर मणि त्रिपाठी
        • श्री वरु देव मणि त्रिपाठी
          1. श्री राम बुझाका मणि त्रिपाठी 
          2. श्री शारदा मणि त्रिपाठी
        • श्री xxxxx

    श्री राम शरण मणि त्रिपाठी वंशावली


    <= इनसे पूर्व


    • श्री राम शरण मणि त्रिपाठी
      • श्री वंशराज मणि त्रिपाठी
      • श्री राम राज मणि त्रिपाठी
      • श्री धर्मराज मणि त्रिपाठी 
      • श्री वृजराज मणि त्रिपाठी

    Tuesday, April 28, 2020

    श्री राम समुझ मणि त्रिपाठी वंशावली

    <= इनसे पूर्व 


    • श्री राम समुझ मणि त्रिपाठी
      • श्री बैजनाथ मणि त्रिपाठी
        • श्री देवता मणि त्रिपाठी
          1. श्री मनीष मणि त्रिपाठी
            • अनुराग मणि त्रिपाठी
            • आदित्य मणि त्रिपाठी 
          2. श्री राजेश मणि त्रिपाठी 
            • आकाश मणि त्रिपाठी  
        • श्री वीरेन्द्र मणि त्रिपाठी
          1. श्री अभिषेक मणि त्रिपाठी 
            • अनंत मणि त्रिपाठी  
      • श्री कुम्भ नाथ मणि त्रिपाठी
        • श्री संकटा प्रसाद मणि त्रिपाठी
        • श्री योगेन्द्र नाथ मणि त्रिपाठी 
        • श्री रविन्द्र नाथ मणि त्रिपाठी
        • श्री हरेन्द्र नाथ मणि त्रिपाठी
        • श्री  देवेन्द्र नाथ मणि त्रिपाठी
      • श्री माता प्रसाद त्रिपाठी 
      • श्री कपिल देव मणि त्रिपाठी
        • श्री सर्वेश मणि त्रिपाठी 
        • श्री नरेन्द्र मणि त्रिपाठी 
        • श्री दिनेश मणि त्रिपाठी  

    पूज्य स्वर्गीय श्री पृथ्वीपाल मणि त्रिपाठी वंशावली


    <= इनके पूर्व 


    • पूज्य स्वर्गीय श्री पृथ्वीपाल मणि त्रिपाठी
      • पूज्य स्वर्गीय श्री गोमती मणि त्रिपाठी
        • श्री गया प्रसाद मणि त्रिपाठी
          1. श्री राजेन्द्र मणि त्रिपाठी 
          2. श्री गजेन्द्र मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री देवकी नंदन मणि त्रिपाठी 

    पूज्य स्वर्गीय श्री अनंत मणि त्रिपाठी वंशावली


    <= इनसे पूर्व 


    • पूज्य स्वर्गीय श्री अनंत मणि त्रिपाठी
      • पूज्य स्वर्गीय श्री घोलर मणि त्रिपाठी
        • श्री वासुदेव मणि त्रिपाठी 
          1. श्री राम करन मणि त्रिपाठी 
          2. श्री शिवकरन मणि त्रिपाठी  
      • पूज्य स्वर्गीय श्री लौटन मणि त्रिपाठी
        • श्री नोहर मणि त्रिपाठी 
          1. श्री शिव प्रसाद मणि त्रिपाठी 
          2. श्री हरिप्रसाद मणि त्रिपाठी  
      • पूज्य स्वर्गीय श्री त्रिभुवन मणि त्रिपाठी
        • श्री अवध राम मणि त्रिपाठी 
          1. श्री बलराम मणि त्रिपाठी 
          2. श्री बेनी राम मणि त्रिपाठी
          3. श्री माधव राम मणि त्रिपाठी  
      • पूज्य स्वर्गीय श्री निवास मणि त्रिपाठी 

    पूज्य स्वर्गीय श्री गुरुप्रसाद मणि त्रिपाठी वंशावली

    <= इनसे पूर्व 


    • पूज्य स्वर्गीय श्री गुरुप्रसाद मणि त्रिपाठी
      • श्री भवानी भीख मणि त्रिपाठी 
      • श्री अमृत नाथ मणि त्रिपाठी
        • श्री सुखदेव मणि त्रिपाठी  
      • श्री हरिराम मणि त्रिपाठी 

    पूज्य स्वर्गीय श्री सुरजू मणि मणि त्रिपाठी वंशावली



    <= इनसे पूर्व


    पूज्य स्वर्गीय श्री पदारथ मणि त्रिपाठी वंशावली


    <= इनसे पूर्व


    • पूज्य स्वर्गीय श्री पदारथ मणि त्रिपाठी
      • पूज्य स्वर्गीय श्री देवी पलटन मणि त्रिपाठी 
        • पूज्य स्वर्गीय श्री मुनेशर  मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री देवी शरण मणि त्रिपाठी 
        •  श्री चन्द्रिका मणि त्रिपाठी 
        • श्री चन्द्र बली मणि त्रिपाठी 
        • श्री सूर्य बली मणि त्रिपाठी 

    पूज्य स्वर्गीय श्री मथुरा मणि त्रिपाठी वंशावली


    <= इनसे पूर्व 


    • पूज्य स्वर्गीय श्री मथुरा मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री सुन्नर मणि त्रिपाठी 
        • श्री संतू मणि त्रिपाठी 

    Monday, April 27, 2020

    कहानी : बहू की सूझ

    यह कहानी उस समय की है जब पूज्य बाबा पारस नाथ मणि त्रिपाठी ने अपने बड़े पुत्र राम चन्द्र त्रिपाठी का विवाह सिद्धार्थ नगर के शोहरतगढ़ तहसील के गाँव परसोहियाँ में बड़े धूम धाम से कर अपने खानदान में अपनी बड़ी बहु लाए थे! आते ही बहू देविका ने घर का सारा काम धाम सम्हाल लिया था,  बहू की समझदारी और घर के काम काज को देख कर सभी उससे बहुत प्रशन्न रहते थे! समय बीतता गया और घर में सबसे बड़े नाती ने जन्म लिया बाबा पारस नाथ ने उसका नाम सुरसरि मणि रखा!

    एक बार की बात है सुरसरि करीब एक साल के रहे होंगे, अपनी माँ देविका के साथ सो रहे रहे थे! रात्रि के करीब 01 बजने को था, बगल के डेवढी (बरामदा) में सुरसरि की दादी भी गहरी नीद में थीं! अँधेरी रात थी, आसमान में तारे भी साफ़ नजर नहीं आ रहे थे! झींगुर ची ची  की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी! बगल के घारी (पशुओं के बाधाने का स्थान) में भैस और उसका पड़वा (बच्चा) बधा था! तभी कुत्तों के भौकने से बहू देविका की नीद टूटी! वो अभी आँखे खोलती कि छप्पर के ऊपर से चढ़कर आँगन में किसी के कूदने की आवाज़ आयी! धपाक!

    देविका अपने बिस्तर पर लेटी सब भांप रही थी! उन्हें एहसास हो गया था कि कोई चोर हमारे घर में चोरी करने घुस आया है! इतने में चोर आगे बढ़ डेहरी (अनाज रखने का मिट्टी का बना एक बड़ा पात्र) के आने (मुंह) को खोल अनाज किसी बोर में भरने लगा, शायद वह अनाज ही चुराने आया था! अनाज़ निकालता देख बहू को एक तरकीब सूझी उसने अनजान बनते हुए अपनी सासू माँ को आवाज लगाई!

    "अम्मा ये अम्मा, लागत है पड़उआ छुटाय गय है, गोहूँवां खात है! "  

    बहू की आवाज़ सुन कर चोर थोडा रुक गया, उधर अम्मा भी जाग गई थी, अम्मा बोलीं

    "बच्चा ढेबरिया जलाओ तो देखी, पता नाइ कौन मेर बाधें रहें!" (ढेबरी: उजाला करने के लिए)

    सासू माँ को जगता देख बहू ने हिम्मत जुटाई, बगल में रखा माचिस उठा कर ताखे (दिवार में बना छोटा आलमारी) पर रखे ढेबरी को जलाने के लिए माचिस की तीली जलाई!

    छररर... माचिस की तीली जल कर बुझ गई,

    लेकिन उसके उजाले में एक धुधला सा चेहरा डेहरी बगल में हाथ में कुछ उठाए खड़ा दिखा! बहू सहम गई, हिम्मत जुटाते हुए दूसरी तीली जलाई,

    इस बार सामने खड़ा चोर साफ़ दिख रहा था मुहँ पर लाल रंग का गमछा बांधे, हाथ में सिल (मसाला पीसने वाला पत्थर) ताने खड़ा था! बहू कुछ समझ पाती तब तक उसके पैर पर कुछ गिरा धड़ाम!  चोर ने बहू के ऊपर सिल फ़ेक दिया था!

    बहू दर्द से कराह उठी, उसने चिल्लाया चोर चोर...
    अम्मा चोर, पकड़ो पकड़ो, घर के सभी लोग जाग गए थे, सब बहू की तरफ दौड़े
    कहाँ चोर? क्या हुआ कहाँ गया?  चोर घबरा कर भागा, बगल के दिवार को फांद कर बेह्रे (घर के पीछे का स्थान) की तरफ भाग गया!
    बाबा अपनी लाठी लेकर पीछे की तरफ गए लेकिन चोर भाग निकला!
    साहसी बहू अब शांत थी उसके पैर के नाख़ून पर गहरी चोट थी लेकिन वह खुश थी कि उसकी सूझ बुझ से घर में चोरी होने से बच गई! सबने उसके इस समझ और बहदुरी भरे कार्य की खूब प्रशंसा की!      

    Sunday, April 26, 2020

    पूज्य स्वर्गीय श्री केशव राम मणि त्रिपाठी वंशावली

    पूज्य स्वर्गीय श्री केशव राम मणि त्रिपाठी, बाबा स्वर्गीय श्री परमेश्वर मणि त्रिपाठी के पुत्र थे बाबा केशव राम मणि त्रिपाठी दो भाई थे, दूसरे भाई का नाम पूज्य स्वर्गीय श्री राम अचल मणि त्रिपाठी था इनके कोई भी पुत्र नहीं थे !

    इनके आगे की वंशावली इस प्रकार है ! (नोट नम्बर वाले नाम [1,2,3....] पर क्लिक करके आगे के वंशज को देखा जा सकता है)

    <= इनसे पूर्व 
    • पूज्य स्वर्गीय श्री केशव राम मणि त्रिपाठी
      • श्री रामानन्द त्रिपाठी
        • श्री शैलेन्द्र त्रिपाठी
          1. अंश त्रिपाठी 
        • श्री सुनील कुमार त्रिपाठी 
          1. सक्षम त्रिपाठी 
        • श्री अभिनव कुमार त्रिपाठी 
        • श्री अरुण कुमार त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री सदानन्द त्रिपाठी 
        • श्री अरविन्द कुमार त्रिपाठी 
          1. सिद्धार्थ त्रिपाठी 
        • श्री आनंद कुमार त्रिपाठी 
        • श्री इंद्र कुमार त्रिपाठी
          1. आदित्य त्रिपाठी  
      • पूज्य स्वर्गीय श्री वृजनंदन त्रिपाठी 
        • विश्वदीपक त्रिपाठी 
          1. विशद त्रिपाठी 
      • श्री यशोदा नन्द त्रिपाठी 
        • श्री उत्कर्ष त्रिपाठी 
        • श्री अनुज कुमार त्रिपाठी

    पूज्य स्वर्गीय श्री शिवदास मणि त्रिपाठी वंशावली

    पूज्य स्वर्गीय श्री शिवदास मणि त्रिपाठी, बाबा स्वर्गीय श्री हरिदयाल मणि त्रिपाठी के पुत्र थे बाबा हृदयराम मणि त्रिपाठी दो भाई थे, दूसरे भाई का नाम पूज्य स्वर्गीय श्री हृदयराम मणि त्रिपाठी था!

    इनके आगे की वंशावली इस प्रकार है ! (नोट नम्बर वाले नाम [1,2,3....] पर क्लिक करके आगे के वंशज को देखा जा सकता है)

    <= इनसे पूर्व 
    • पूज्य स्वर्गीय श्री शिवदास मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री नागेश्वर मणि त्रिपाठी 
        • पूज्य स्वर्गीय श्री महादेव मणि त्रिपाठी
          1. पूज्य स्वर्गीय श्री गंगा मणि त्रिपाठी 
          2. पूज्य स्वर्गीय श्री अशरफ़ी मणि त्रिपाठी 
          3. पूज्य स्वर्गीय श्री बिंदा मणि त्रिपाठी 
        • पूज्य स्वर्गीय श्री परमेश्वर मणि त्रिपाठी 
          1. पूज्य स्वर्गीय श्री केशव राम मणि त्रिपाठी 
          2. पूज्य स्वर्गीय श्री राम अचल मणि त्रिपाठी 
        • पूज्य स्वर्गीय श्री मंगल मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री गोकुल मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री कुलदीप मणि त्रिपाठी 

    Friday, April 24, 2020

    श्री गोपीनाथ मणि त्रिपाठी वंशावली

    <= इनसे पूर्व 


    • श्री गोपीनाथ मणि त्रिपाठी
      • हर्षित मणि त्रिपाठी 
      • आदर्श मणि त्रिपाठी  

    श्री यमुना मणि त्रिपाठी वंशावली

    <= इनसे पूर्व 


    • श्री यमुना मणि त्रिपाठी 
      • राज कमल त्रिपाठी 
        • अनंत राज त्रिपाठी 
        • श्रीमंत राज त्रिपाठी 
      • राज कुँवर त्रिपाठी 

    श्री सुरसरि मणि त्रिपाठी वंशावली

    <= इनसे पूर्व

    • श्री सुरसरि मणि त्रिपाठी
      • प्रशान्त मणि त्रिपाठी
        • श्रेष्ठ मणि त्रिपाठी

    कहानी: जब डाकुओं ने कहा "मार दिया साला"

    अप्रेल माह का शुरुआती दिन था गेहूँ की फसल पक कर तैयार अपने कटने का इंतज़ार कर रही थी। दिन में ज्यादा धूप होने के नाते  गेहूं की कटाई  रात में  हुआ करते थे  शाम के समय  लोग अपने खेतों में  जाते  और चांद की रोशनी में  गेहूं  काटते थे। रात के करीब  10:00 बजने को थे अधिकतर लोग  अपने खेतों में  जाने के लिए तैयार बाले चाचा के घर के सामने कुछ गपशप कर रहे थे, तभी गांव के पूरब पोखरे की तरफ से शौच से लौट रहे लालमन ने  घबराते हुए आवाज में  बताया कि पोखरे के उस तरफ कुछ लोग  भारी संख्या में  टॉर्च जला रहे हैं,  लगता है  वहां पर  डाकुओं का झुंड है  जो आज रात में  हमारे गांव पर  हमला कर सकता है। गया बाबा ने लालमन को डांटते हुए कहा "धत्त तेरी की यहां कहां डाकू आ जाएंगे, अरे कोई और होगा जो  अपने खेत में कटाई कर रहा होगा।" अरे नहीं नहीं बाबा मैंने तो एक को पेड़ पर चढ़ा हुआ भी देखा वह पेड़ पर टार्च जलाकर गांव की तरफ देख रहा था लालमन ने फिर से अपनी बात रखी। अब सभी को लालमन की बातों पर बातों पर विश्वास होने लगा था।  सबने सोचा क्यों ना एक साथ चल कर  पोखरे के उस तरफ देखा जाए, अगर सच में वहां कोई डाकुओं का झुंड है तो हम लोग  उसे गांव में आने से पहले ही खदेड़ दें।

    देखते ही देखते  या खबर  पूरे गांव में आग की तरह फैल गई सभी लोग अपने अपने घरों घरों से  लाठी-डंडे लेकर  पोखरे की तरफ निकल पड़े। गांव के जाने-माने पहलवान और लठैत बाबा कृष्णकांत भी अपना तेल लगा हुआ मोटा वाला लाठी लेकर पोखरे पर चलने को तैयार थे। सबके हाथ में  लाठी-डंडे, टॉर्च, लालटेन आदि  दिख रहे थे। गांव की महिलाएं अपने-अपने घरों से निकलकर किसी के बड़े घर में इकट्ठा होकर दरवाजा बंद कर छुप गई थी, की अगर डाकू ने हमला किया तो हम सब एक साथ उन पर टूट पड़ेंगे। सबने  पोखरे की तरफ आगे बढ़ते हुए तेज स्वर में  आवाज लगाई  "रुके रहो - रुके रहो आ गए गए रुके रहो आ गए गए हम। भागना नहीं  एक एक को वही मारेंगे, एक भी डाकू आज हमारे हाथों से बचने नहीं पाएगा।"

    उधर यूपी बोर्ड की परिक्षाएं चल रही थी। ड्यूटी पर लगे पांडे दरोगा जी  अपने  अन्य  साथी पुलिस कर्मियों के साथ रात्रि में विश्राम के लिए विद्यालय के आस पास ही कहीँ रहा करते थे। इतने सारे लोगों का एक साथ शोर सुनकर शोर सुनकर सुनकर पांडे दरोगा जी अपनी पूरी टीम के साथ गांव की तरफ निकल पड़े। दरोगा जी अपनी बड़ी वाली टार्च जलाते हुए दहाड़े "रुको रुको हम भी आ गए कोई भागेगा नहीं वहीं ठहर जाओ किसी को नहीं छोड़ेंगे"

    दूसरी तरफ से पांडे दरोगा जी की दहाड़ सुनकर गांव के लोग घबरा गए उन्हें लगा कि उधर से डाकुओं ने भी हमला कर दिया है। घर में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सब लोग अपने घर की तरफ भागने लगे। भागो भागो डाकुओं ने गांव पर हमला गांव पर हमला कर दिया है, अपने-अपने घरों में छिप जाओ घर जाओ, घर के दरवाजे बंद करो ऐसा शोर मचाते मचाते हुए गांव का एक व्यक्ति दौड़ा।

    पूरे गांव में भगदड़ मच गई सब लोग अपने अपने घर का दरवाजा बंद किए डाकुओं का इंतजार करने लगे। बाबा कृष्णकांत अपने भतीजे जमुना के साथ लाठी लिए दरवाजे के किनारे खड़े थे। एक तरफ लठैत बाबा दूसरी तरफ उनका भतीजा जमुना लाठी ताने बिल्कुल बिल्कुल तैयार खड़े थे। तभी सड़क के किनारे एक महिला अपना घड़ा लिए भाग रही थी। उधर दरोगा पांडे जी मोटरसाइकिल लिए महिला के पास आ धमके उन्हें देखते हैं महिला अपना घड़ा लिए उनके मोटरसाइकिल के सामने गिर पड़ी। "मुझे छोड़ दो मुझे छोड़ दो मुझे मत मारना कहती हुई रोने लगी" पांडे जी बोले "अरे अरे घबराओ नहीं क्या हुआ कौन तुम्हें मार रहा है मैं हूँ, पांडे दरोगा डरो नहीं कहां गया डाकू मुझे बताओ कोई नहीं बच पाएगा किधर है" पांडे जी ने अपनी तेज आवाज में बोला। पांडे जी की आवाज सुनकर लठैत बाबा और आसपास के लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकलने लगे। कोई मंडीले (पशुओं के भूसा रखने का स्थान) से निकल रहा था, तो कोई कंडउरे (चूल्हा जलाने वाले उपले का स्थान) के नीचे से बाहर आ रहा था। पांडे जी ने लठैत बाबा से पूछा "तिवारी जी कहां है डाकू किधर गए?"

    शायद इतने सारे लोगों को अपनी तरफ आता देख भाग गए या फिर उधर गेहूं के खेत की तरफ छुप गए होंगे, लठैत बाबा ने जवाब दिया। धीरे धीरे सभी लोग अपने घरों से बाहर आने लगे सारा माहौल शांत हो रहा था, पुलिस की टीम को गांव में देखकर सब ने चैन की सांस ली।

    हम लोग यही पास वाले स्कूल में में रुके हुए हैं हमारी ड्यूटी यही है आप लोग घबराए नहीं कोई डाकू गांव पर हमला नहीं कर सकता पांडे जी ने सब को सांत्वना दे कर विश्राम करने चले गए।

    इधर लठैत बाबा अपने घर में भोजन करते हुए उसी बात की चर्चा कर रहे थे मैं और जमुना दोनों लाठी लेकर खड़े थे अगर कोई घर में घुसता तो एक लाठी इधर से और एक लाठी उधर से पड़ता डाकू का बच्चा तुरंत छटपटा कर गिर जाता कहता "अरे बाप मर गए अरे दादा मर गए"।
    तभी प्रधान बाबा बोले ऐसे थोड़ी ना कहता, अपने हाथ में उठाया हुआ कौर थाली में रखते हुए बोले लाठी पड़ते ही डाकू कहता "मार दिया साला"

    Wednesday, April 22, 2020

    पूज्य स्वर्गीय श्री राम जियावन मणि त्रिपाठी वंशावली

    पूज्य स्वर्गीय श्री राम जियावन  मणि त्रिपाठी, बाबा स्वर्गीय श्री दशरथ मणि त्रिपाठी के पुत्र थे बाबा राम जियावन मणि त्रिपाठी दो भाई थे, दूसरे भाई का नाम पूज्य स्वर्गीय श्री पृथ्वीपाल मणि त्रिपाठी था!

    इनके आगे की वंशावली इस प्रकार है ! (नोट नम्बर वाले नाम [1,2,3....] पर क्लिक करके आगे के वंशज को देखा जा सकता है)

    <= इनसे पूर्व 
    • पूज्य स्वर्गीय श्री राम जियावन मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री पारस नाथ मणि त्रिपाठी
      • पूज्य स्वर्गीय श्री विश्वनाथ मणि त्रिपाठी 
        • श्री लक्ष्मी कान्त मणि त्रिपाठी 
          1. श्री अमित मणि त्रिपाठी 
            • त्रिजल मणि त्रिपाठी 
      • पूज्य स्वर्गीय श्री आश्चर्य नाथ मणि त्रिपाठी (दिवंगत 28/12/2022)

    पूज्य स्वर्गीय श्री हृदयराम मणि त्रिपाठी वंशावली

    पूज्य स्वर्गीय श्री हृदयराम मणि त्रिपाठी, बाबा स्वर्गीय श्री हरिदयाल मणि त्रिपाठी के पुत्र थे बाबा हृदयराम मणि त्रिपाठी दो भाई थे, दूसरे भाई का नाम पूज्य स्वर्गीय श्री शिवदास मणि त्रिपाठी था!
    इनके आगे की वंशावली इस प्रकार है ! (नोट नम्बर वाले नाम [1,2,3....] पर क्लिक करके आगे के वंशज को देखा जा सकता है)

    <= इनसे पूर्व 

    ये हैं सरयूपारीण ब्राहमणों के मुख्य गाँव

     गर्ग (शुक्ल- वंश) गर्ग ऋषि के तेरह लडके बताये जाते है जिन्हें गर्ग गोत्रीय, पंच प्रवरीय, शुक्ल बंशज  कहा जाता है जो तेरह गांवों में बिभक्त ...